- कोतवाली पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ रजिस्टर्ड की FIR
- रजिस्टर्ड वसीयत को दरकिनार कर रजिस्ट्री कराने का मामला
- पैरवी करने पर कचहरी में रोककर पीड़ित को दी थी धमकी
- जांच कमेटी की रिपोर्ट पर सस्पेंड हो चुके हैं दोनों कर्मचारी
- दोनों कर्मचारियों के करतूतों की जांच पुलिस ने भी की
Yogesh Tripathi
रजिस्टर्ड वसीयत और दान-विलेख पत्र को दरकिनार कर अवैध तरीके से कृषि
भूमि का बैनामा कराने और पीड़ित अधिवक्ता को जानमाल की धमकी देने के मामले में “सिस्टमबाज” महिला लेखपाल अरुणा
दिवेदी और राजस्व कर्मचारी आलोक दुबे समेत 7 लोगों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का "हंटर" आखिर चल गया। कोतवाली पुलिस ने सभी के खिलाफ FIR रजिस्टर्ड की है। सरकारी पदों पर आसीन इन दोनों
भ्रष्ट कर्मचारियों को विभागीय जांच Report के बाद Officer’s सस्पेंड कर चुके हैं। कोतवाली पुलिस मुकदमा
पंजीकृत कर मामले की जांच प्रक्रिया में जुट गई है। गौरतलब है कि DM (Kanpur Nagar) के बाद पुलिस कमिश्नर (कानपुर) ने भी शिकायत
मिलने पर जांच बैठाई थी। जिसकी रिपोर्ट एक महीने के अंदर जांच कर रहे मातहतों को
देनी थी। उल्लेखनीय है कि इस बड़ी खबर को www.redeyestimes.com (News Portal) ने सबसे पहले प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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पीड़ित अधिवक्ता संदीप सिंह |
पेशे से अधिवक्ता ग्राम कला का पुरवा, (रामपुर भीमसेन), थाना सचेंडी, कानपुर निवासी Sandeep Singh ने बताया कि उनकी दादी स्वर्गीय श्रीमती मोहन लाला उर्फ लाल साहिबा ने
प्रार्थी व उसके भाई प्रदीप सिंह, पिता बीरेंद्र बहादुर सिंह उर्फ भोला सिंह, चाचा
जंगबहादुर सिंह व अशोक सिंह को अपनी कृषि भूमि की रजिस्टर्ड वसीयत 31/05/2013 को
की थी। स्वर्गीय श्रीमती मोहन लाला ने 17/07/2013 को पंजीकृत दान विलेख के जरिए
अन्य भूमि/संपत्तियों के साथ-साथ एक और ग्राम सिंहपुर कठार स्थित आराजी संख्या
207/1.0990 हेक्टेयर तथा रामपर भीमसेन स्थित आराजी संख्या 895/1.7580 हेक्टयर की
भी लिखापढ़ी की थी। दादी की रजिस्टर्ड़ वसीयत और दान विलेख के जरिए मिली
संपत्तियों का प्रार्थी संदीप सिंह, उसके भाई प्रदीप सिंह, पिता बीरेंद्र बहादुर
सिंह उर्फ भोला सिंह, चाचा जंगबहादुर सिंह व अशोक सिंह संपत्तियों की देखरेख व
कृषि योग्य भूमि पर खेती करते आ रहे हैं। सभी के पास मालिकाना हक भी है।
Sandeep Singh का
आरोप है कि उनकी बुआ राजपति देवी W/O रघुवीर सिंह ने इस
वसीयत के खिलाफ सिविल जज सीनियर डिवीजन (कानपुर नगर) की कोर्ट में मूलवाद संख्या
2550/2013 राजपति देवी बनाम बीरेंद्र सिंह आदि का वाद दाखिल किया। बाद में श्रीमती
राजपति ने खुद ही यह वाद Court
में वापस ले लिया। राजपित देवी ने दादी स्वर्गीय
मोहन लाला उर्फ लाल साहिबा के पंजीकृत दान विलेख के खिलाफ सिविल जज (जूनियर
डिवीजन) / एफ.टी.सी कोर्ट में मूलवाद संख्या 1368/2013 को प्रस्तुत किया। इस वाद
को भी श्रीमती राजपति देवी ने कोर्ट में मौजूद रहकर वाद को वापस ले लिया।
Sandeep Singh का
आरोप है कि उनकी बुआ राजपति देवी और राजकुमारी देवी ने प्रार्थी की दादी स्वर्गीय
श्रीमती मोहन लाला के रजिस्टर्ड वसीयत को छिपाकर धोखाधड़ी करते हुए उक्त कृषि
योग्य भूमि को अपने नाम सरकारी अभिलेखों में चढ़वाने के लिए नायब तहसीलदार (बिठूर)
की कोर्ट में वाद हल्का लेखपाल Aruna Dwivedi मकान नंबर 14-B बाबा नगर नौबस्ता,
कानपुर और तहसील राजस्व कर्मचारी आलोक दुबे S/O स्वतंत्र कुमार दुबे
R/O एलआइजी 17, दयानंद विहार फेस-1, कल्याणपुर,
कानपुर नगर की साठगांठ से प्रस्तुत किया। इस दौरान प्रार्थी के मुकदमें अलग Court में चल रहे थे। जिसे भी राजकुमारी और राजपित देवी
ने नायब तहसीलदार (बिठूर) कोर्ट से छिपा लिया।
नायब तहसीलदार (बिठूर) की कोर्ट ने एक पक्षीय आदेश 11/03/2024 राजपति
देवी और राजकुमारी के पक्ष में सुनाते हुए भूमि को उनके नाम पर सरकारी अभिलेखों
में अंकित करने का आदेश जारी किया।
चूंकि स्थानीय लेखपाल Aruna Dwivedi और
राजस्व कर्माचारी आलोक दुबे की की साठगांठ पहले से थी, इस लिए नायब तहसीलदार
(बिठूर) कोर्ट ने 11/03/2024 जब एक पक्षीय आदेश दिया तो राजपति देवी, राजकुमारी ने
स्थानीय लेखपाल अरुणा दिवेदी और राजस्व कर्मचारी आलोक दुबे को उसी दिन अर्थात
11/03/2024 को फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर आराजी संख्या 895 का जुज
रक्बा 0.3070 का दोनों के हक में बैनामा कर दिया। 12/03/2024 को राजकुमारी देवी ने
राजपति के हक में अवैध तौर पर दानपत्र भी निष्पादित कर दिए। इतना ही नहीं श्रीमती
राजपति ने अन्य आराजियों का भी अवैध तौर पर विक्रय अनुबंध पत्र अरुणा व आलोक के हक
में कर दिया।
संदीप सिंह का आरोप है कि करीब पांच महीने बाद स्थानीय लेखपाल रहीं
अरुणा दिवेदी और राजस्व कर्मचारी आलोक दुबे ने उपरोक्त सभी भूमि 06/08/2024 को
कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से धोखाधड़ी करते हुए सभी कागजातों को वैध बताकर
मालिकाना हक आर.एन.जी इंफ्रा R/O 15/78 सिविल लाइंस
कानपुर नगर के भागीदार अमित गर्ग S/O स्वर्गीय प्रेम
नारायण गर्ग से साठगाठ करके एक सुनियोजित षडयंत्र के तहत फर्जी विक्रयनामा
आर.एन.जी इंफ्रा के पक्ष में विक्रयनामा निष्पादित कर विक्रय कर दिया।
आरोप है कि इसी तरह लेखपाल Aruna Dwivedi और
तहसील कर्माचारी आलोक दुबे ने प्रार्थी संदीप सिंह व अन्य परिजनों की ग्राम
सिंहपुर कठार स्थित आराजी संख्या 207 रक्बा 0.5495 हेक्टेयर का कूटरचित दस्तावेजों
के माध्यम से दिनांक 16/05/2024 को अपने हक में फर्जी विक्रय पत्र निष्पादित करवा
लिया। जबकि उपरोक्त आराजी संख्या 207 पर श्रीमती राजपति देवी और राजकुमारी का किसी
भी प्रकार का मालिकाना हक नहीं था।
Sandeep Singh का आरोप है कि
राजपति देवी, राजकुमारी देवी ने अपने परिजनों और लेखपाल अरुणा दिवेदी और तहसील
कर्मचारी आलोक दुबे व अमित गर्ग ने आपसी सांठगांठ कर सुनियोजित षडयंत्र के तहत
आर्थिक लाभ प्राप्त करने की नीयत से फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों को तैयार कर
उपरोक्त सभी भूमि का बैनामा करवा लिया। सभी लोगों ने गिरोह बनाकर कूटरचित कागजातों
के जरिए न सिर्फ फर्जी बैनामा करवाया बल्कि प्रार्थी व उसके परिजनों को आर्थिक और
मानसिक अपूर्णनीय भी पहुंचाई है।
अपने साथ हुई धोखाधड़ी और जानमाल की धमकी मिलने के बाद Sandeep Singh ने पूरे प्रकरण की शिकायत मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ, जिलाधिकारी कानपुर नगर और पुलिस कमिश्नर कानपुर नगर से की थी.
जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी।
पुलिस कमिश्नर ने भी जांच के आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट के बाद दोनों राजस्व
कर्मचारी आलोक दुबे और महिला लेखपाल अरुणा दिवेदी को कुछ दिन पहले सस्पेंड कर दिया
गया।
कोतवाली पुलिस ने देर रात्रि अरुणा दिवेदी, आलोक दुबे, राजपति देवी,
राज कुमारी, रघुवीर सिंह, अमन सेंगर, अमित गर्ग के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (4) धोखा देकर किसी की संपत्ति हस्तानांतरित करना (तीन
साल की सजा का प्रावधान है)। BNS (338) के जाली दस्तावेज
बनाना (इसमें 10 साल तक की सजा का प्रावधान है)। BNS 336 (3) धोखाधड़ी के इरादे
से जालसाजी करना (7 साल तक की सजा का प्रावधान) । BNS 341 (2) जालसाजी के लिए किसी की नकली मुहर और नेमप्लेट
का प्रयोग करना । BNS 61
(2) दो या दो से अधिक लोग जब मिलकर किसी
अपराध करने का प्लान बनाते हैं (सजा और जुर्माना) दोनों का प्रावधान है। BNS (352) जान
बूझकर किसी व्यक्ति का अपमान करना या अपराधिक कार्य के लिए उकसाना (दो साल की सजा
और जुर्माने का प्रावधान)।
BNS 351 (3) किसी व्यक्ति को
गंभीर चोट पहुंचाना या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी देना ( इसमें 7 साल की सजा और
जुर्माने का प्रावधान है)।